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विविध धर्मों में जैव-विविधता_5

“एक नेक व अच्छा इंसान वही है, जो प्रकृति मे सभी छोटे-बड़े, अतिसुक्ष्म, निर्जीव-जीव प्राणियों का व वनस्पति जगत का आदर करता है और उनके संरक्षण को परम धर्म मानता हैं”- रुपक

ईसाई धर्म

ईसाई एकेश्वरवादी हैं, लेकिन वे ईश्वर को त्रीएक के रूप में समझते हैं- परमपिता परमेश्वर, उनके पुत्र ईसा मसीह (यीशु मसीह) और पवित्र आत्मा।

ईसाई धर्म पन्थ की आधारशिला तथा ईसाइयों का पवित्रतम धर्मग्रन्थ है- बाइबिल

‘उत्पत्ति’ (Genesis)- अन्य प्राणियों के साथ मानवता की समानता पर बल देती हैं। बताती है कि मानव प्राणी के रूप में हमारा कार्य संपूर्ण अच्छी सृष्टि के फलने-फूलने में सहायता करने के लिए ईश्वर की महिमा करना है। इस प्रकार, जैव विविधता संरक्षण एक मिशनल व धार्मिक प्रचार प्रसार का भी कार्य बन जाता है।

बाइबिल

मानवकेंद्रित विचार (जो दुनिया को मानव हितों के लिए देखते हैं) और पारिस्थितिक विचार (जिसका उद्देश्य सभी प्रजातियों को समान रूप से महत्व देना है) प्रतिस्पर्धा करते हैं लेकिन त्रुटिपूर्ण हैं। परंतु बाइबिल के अनुसार मानव और गैर-मानव प्राणी दोनों ही परमेश्वर की महिमा के लिए बनाए गए हैं और सीधे तौर पर परमेश्वर के संबंध में उनका मूल्य है। यह जैव-विविधता संरक्षण के लिए, ईसाईयो के दृष्टिकोण पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। 

ईसाई धर्म में प्रकृति से जुड़ाव को प्रमुखता दी गई।

पृथ्वी पर रहने वाले जीवों की अनुमानित 5 से 15 मिलियन प्रजातियों में से केवल 1.75 मिलियन की ही पहचान की गई है।

कई प्रजातियां जो हालांकि विशेषज्ञों द्वारा ज्ञात नहीं हैं, वे भी जीवमंडल में समान रूप से आवश्यक हैं।

पोप जॉन पॉल द्वितीय

‘प्रकृति का सम्मान और संरक्षण किया जाना चाहिए ताकि इसके साथ एक स्वस्थ उचित संबंध बनाया जा सके जिससे लोगों को परमेश्वर की महानता और प्रेम के रहस्य पर विचार करने के लिए प्रेरित किया जा सके’

जैव-विविधता संरक्षण

ईसाइयों के लिए, जैव-विविधता संरक्षण, उनके दैनिक जीवन का केंद्रबिंदु है।

धार्मिक ग्रन्थ बाइबिल में कहा गया है-

”जैव विविधता’ के लिए “फलदायी बनो और (गिनती में) बढ़ते रहो, आकाश और समुद्र को भर दो”

परमेश्वर ने आकाश, भूमि और समुद्र को प्रचुर और विविध जीवन से भरा हुआ हैं।

‘तेरे काम कितने हैं, हे ईश्वर! तूने अपनी बुद्धि से इन सबको बनाया है; पृथ्वी तेरे प्राणियों से भरी हुई है

असीसी के सेंट फ्रांसिस द्वारा कैंटिकल ऑफ क्रिएशन मे:

“हे मेरे प्रभु, हमारी पृथ्वी के द्वारा आपकी स्तुति हो, जो हमें पालने और संचालित करती है, और जो रंगीन फूलों और जड़ी-बूटियों के साथ विभिन्न फल पैदा करती है”

असीसी के फ्रांसिस, जानवरों को करीबी दोस्तों के रूप में शामिल करने, प्यार और दया के योग्य होने के लिए प्रसिद्ध हुए।

फ्रांसिस (2015, धारा 84)

“प्रत्येक मनुष्य ईश्वर की एक छवि है, पर हमें इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए कि प्रत्येक प्राणी का अपना उद्देश्य है। कोई भी अतिश्योक्तिपूर्ण नहीं है”

समग्र वर्तमान स्थिति सभी प्राणियों के साथ मेल-मिलाप की तत्काल आवश्यकता पर बल देती है।

बर्कमैन, 2004

ईसाई धर्म शाकाहारी धर्म नहीं है। फिर भी, इसमें मांस खाने से परहेज करने के महत्व पर प्रकाश डाला है ताकि पतन से पहले जीवन की शुद्धता को महसूस करने में मदद मिल सके, और इस तरह नई सृष्टि की पूर्ण अहसास के लिए तैयार हो सके।

असीसी के सेंट फ्रांसिस

ईशु उन लोगों को विनाश की चेतावनी देता है जो पृथ्वी को नष्ट करते हैं।

पेड़-पौधों का संरक्षण

परमेश्वर चाहता है कि हम सृष्टि की फलदायिता का संरक्षण करें।

प्रमुख त्यौहार क्रिसमस पर ‘क्रिसमस ट्री’ को सजाया जाता हैं जो उनकी हर इच्छा को पूरा करने वाला कल्प वृक्ष है। पूरी बाइबल के अंतिम अध्याय तक, हमें विभिन्न प्रकार के वृक्षों का उल्लेख मिलता है। 

बाइबिल के किंग जेम्स संस्करण में, सात फूल, सात सब्जियां, कई सारे मसाले और सैंतीस अलग-अलग नाम के पेड़ का उल्लेख किया गया है। जैसे अंजीर का पेड़, ताड का पेड़, ओंक, देवदार के पेड़ इत्यादि। 

गूलर या अंजीर का पेड़: यह बाइबिल में वर्णित पहली पेड़ की प्रजाति है।इसका फल हरा होता है और पत्तियों के बीच आसानी से पता नहीं चलता है जब तक कि यह पक न जाए। यीशु फल की इच्छा से अंजीर के पेड़ के पास आये, परन्तु केवल पत्ते पाये तो उन्होंने को पेड़ को शाप दिया था और वह जड़ से सूख गया था। एडम और ईव ने परमेश्वर की आंखों से अपने पापों को छिपाने के लिए अंजीर के पेड़ पर पत्तों का इस्तेमाल किया। 

किसी समय मे अंजीर के पेड़ का इस्तेमाल यीशु को दिखाने के लिए किया जाता था।

The World Council of Churches (May 2019)

परिषद ने एक बयान में कहा कि

“ईश्वर उसके सभी जीव-जंतुओ और वनस्पति जगत से प्यार करते हैं, जो आंतरिक सुंदरता और अच्छाई से धन्य हैं, फलित है”

परमेश्वर के सभी प्राणियों के लिए, हमारे द्वारा पृथ्वी गृह को फलदायी व रहने लायक रखने से सृष्टिकर्ता और सभी चीज़ों के स्वामी, परमेश्वर की स्तुति होती है।

सेंट पॉप फ्राँसिस कहते हैं, हमें “पृथ्वी की पुकार को सुनने की जरूरत है”

पर्यावरण संकट के साथ साथ, अब इसाई धर्म में मानव जाति के अस्तित्व के लिए, अधिक से अधिक पादरी, एक स्वस्थ वातावरण बहाल करने के लिए, दृढ़ विश्वास व आस्था के साथ आ रहे हैं। 

“यीशु जंगली जानवरों के साथ थे”मार्क सुसमाचार, जो प्रकृति के साथ मानवीय संबंधों पर आधारित है उसमें जंगली जानवरों के साथ शांति और साहचर्य शामिल है।

बाइबिल में कहा गया है कि पेड़-पौधे, जीव-जंतु ईश्वर की देन है, एवं उनकी सुरक्षा करना हर ईशु भक्त का परम धर्म है।

रुपक

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By Rupak

Environment | Researcher | Renewable (Solar) | M.Tech | B.Tech | PGD in Environmental Law | Social work (Health, Environment, Women Empowerment, Education)| Nature Enthusiast| Wildlife Photography| Bird watcher| Blogger| Environmentalist
*Standing every day for dignity.
Believe in Humanity- Love & Compassion*

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