
जैसे समय के साथ हर क्षेत्र मे नए बदलाव आये है वैसे ही खानपान के क्षेत्र मे भी बदलाव साफ देखे जा सकते है। एक तरफ जहाँ बर्गर, पिज़्ज़ा जैसी चटपटे फास्ट फूड्स खाने को मिलते है व विभिन्न प्रकार की तकनिकियां आ गयी है वही दूसरी तरफ एक साधरण सी चीज़ आज भी लोगो के स्वाद मे शामिल है। वह व्यंजन है चटनी। यह भिन्न-भिन्न रूप मे भिन्न-भिन्न जगहो पर भोजन का एक छोटा परंतु अहम हिस्सा है। आज हम इसी साधारण अपितु अधभूत विषय पर बात करेंगे।
चटनी: अनेक चीजों का मिश्रण
चटनी – चाटना , भोजन के साथ खाया जाने वाला। चटनी एक बहुत ही सादगी भरा, पोषणयुक्त, स्वाद से भरपूर व्यंजन है जो हमारे समाज, संस्कृति और रहन सहन का हमेशा से हिस्सा रहा है।

हमारे हरियाणा की कुछ लोकप्रिय और पसंदीदा चटनियां :
- कचरी/काचर की चटनी
- चने के साग, बथुए के साग, सरसों के साग की चटनी
- करोंदा की चटनी
- हरीमिर्च, धनिया, लहसुन की चटनी
- प्याज की चटनी
- पुदीना की चटनी
- पालक की चटनी
- इमली, अनार की मीठी चटनी
- सूखी लाल मिर्च की चटनी
- टमाटर की चटनी
- सांगर की चटनी आदि।
महारे हरियाणा मै दूध दही का खाणा कै साथ होवे सै देशी चटनियां 🙂
मुख्य सामग्री –
- सामग्री की शुद्धता और बनाने वाले का उत्साह।
- सादगी
ये दोनों ही मुख्य सामग्रियां हैं जो एक चटनी को अच्छा बनाती हैं।
बाकी जानकारी के लिए, मिठी चटनी मे गुड़, इमली, खरबूजे के बीज आदि डाला जाते है। हरियाणा में लगभग चटनियों में दही डाला जाता है बाकि कुछ लोग पानी भी डालके बनाना पसंद करते है।

चटनियाँ कच्ची सब्ज़ी, मसालों, सूखे मसालों, फलो इत्यादि को को सिल-बट्टे (पत्थर से बना हुआ) पर पीसकर या ब्लेंड कर के बनायी जा सकती है। कई बार कुछ चटनियों को कढ़ायी मे पकाकर भी तैयार किया जाता है।
मुख्य सामग्री मे हरी मिर्च, लहसून, सूखा धनिया, नमक डालते है। कुछ चटनियों मे जीरा, अदरक, सोंठ, तिल, हींग आदि भी डाल लेते है। बाकी मूल क्षेत्र के अनुरूप लोग भिन्न भिन्न प्रकार के चीज़े चटनी मे शामिल करते है।
जैसे दक्षिण भारत में कढी पत्ते, इमली, कच्ची कैरी, कच्ची मूंगफली, टमाटर, सूखी लाल मिर्ची, नमक, लहसुन, गौंगुरा आदि से चटनी बनाई जाती हैं।

किसी भी गुणकारी पेड़ की लकड़ी से मुसल बनाकर ओखली मे कुटकर, पिसकर अच्छे से चटनी तैयार करते है। और चटनी मे पेड़ की लकड़ी का रस व सभी पोषक तत्व मिल जाते है जिसे स्वाद भी बढ़ता है और स्वास्थ्य के लिए अच्छी मानी जाती है।

आम की चटनी, खारा , टमाटर व नारियल की चटनी बहुत अधिक प्रचलित है। इसे इडली डोसा के साथ बहुत पसंद किया जाता है। पाचाड़ी भी बनाते है। कद्दू, लोकी, गोभी, चकुन्दर आदि अनेको सब्जियों की चटनी भोजन मे शामिल की जाती है।

चटनी और पितृसत्ता
चटनी और पितृसत्ता के बीच गहरा संबंध है। परंपरागत रूप से भारत में महिलाएं पूरे परिवार को खाना खिलाने के बाद खाती, इसका मतलब यह है कि जब तक महिलाएं खाने के लिए बैठती, तब तक उनके पास खाने के लिए शायद ही कोई भोजन बचता। यह महिलाओं में कुपोषण की उच्च दर के लिए सामान्य कारण भी रहा है। इसके समाधान के रूप में, धीरे-धीरे महिलाएं आसानी से उपलब्ध सामग्री से चटनी बनाने की ओर रुख करने लगी। उस व्यंजन मे कुछ भाँति-भाँति के सामग्री डालकर चटनी के रूप मे खाया जाने लगा ताकि पोषण भी मिले और कम समय मे बन सके।
विदेशो मे चटनी को रेफ्रिजरेटर मे रखकर लंबे समय तक के लिए इस्तेमाल मे लाते है। पर भारत और अन्य पड़ोसी देशों मे खाने से पहले ताजा बनाया जाता है। आसानी से उपलब्ध और मौसमी चीजों से तुरंत बिना समय लगे तैयार हो जाती है।

चटनी खाने मे बहुत ही अधिक स्वादिष्ट और गुणों से भरपूर होती है। आज पूरे भारत मे हर घर परिवार मिलकर अलग अलग तरह की चटनी का आनंद लेते है।
आप भी बताये आपके यहाँ किस चटनी को ज्यादा पसंद किया जाता है।
रुपक
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One reply on “चटनी (Chutney)”
बहुत ही बढ़िया रुपक दीदी।काफ़ी अच्छे तरीक़े स आपने स्वादिष्ट चटनी के महत्व को समझाया।
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