मुझे पंख दो…
मुझे जीना है, मुझे उङना है,
मुझे बुराइयों से लङना है।
मेरी शिक्षा ही है मेरी ताकत,
क्यों वंचित रहूं मैं इससे, ये है मेरा अधिकार,
मुझे आगे बढना है, मुझे उङना है।

नए कीर्तिमान स्थापित करने है,
देश को आगे ले जाऊगीं
देश की बेटी कहलाउगीं….
मुझे पंख दो…
मुझे जीना है, मुझे उङना है।
~रुपक
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3 replies on “मुझे उङना है…”
आपकी सुंदर रचना पढ़ कर ये गीत याद आया… छोटा सा दिल है छोटी सी आशा। चांद तारों को छूने की आशा..आसमानों में उड़ने की आशा।
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Thank you mam!
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Welcome.🌹
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